अंगिरस दीपिका एक प्राचीन भारतीय ग्रंथ है जो ज्योतिष शास्त्र से संबंधित है। यह ग्रंथ महान ऋषि अंगिरस द्वारा रचित माना जाता है, जो वेदों के रचयिता और प्रसिद्ध सप्तर्षियों में से एक हैं। अंगिरस दीपिका में ज्योतिष विद्या के विभिन्न पहलुओं का विस्तार से वर्णन किया गया है, जिसमें ग्रहों की स्थिति, राशियों का प्रभाव, और जन्म कुंडली की व्याख्या शामिल है। यह ग्रंथ ज्योतिष शास्त्र के विद्यार्थियों और विद्वानों के लिए महत्वपूर्ण संदर्भ सामग्री के रूप में जाना जाता है।
1. परिचय (Introduction)
अंगिरस दीपिका में ज्योतिष शास्त्र के विभिन्न सिद्धांतों और नियमों का वर्णन किया गया है। यह ग्रंथ वेदों और उपनिषदों के ज्ञान पर आधारित है और इसे प्राचीन भारतीय ज्योतिष के महत्वपूर्ण ग्रंथों में से एक माना जाता है।
2. ग्रहों का वर्णन (Description of Planets)
इस ग्रंथ में नौ ग्रहों (सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, बृहस्पति, शुक्र, शनि, राहु, और केतु) का विस्तृत वर्णन किया गया है। इसमें ग्रहों की स्थिति, उनके प्रभाव, और उनकी चाल के बारे में जानकारी दी गई है।
3. राशियों का प्रभाव (Impact of Zodiac Signs)
अंगिरस दीपिका में बारह राशियों (मेष, वृषभ, मिथुन, कर्क, सिंह, कन्या, तुला, वृश्चिक, धनु, मकर, कुम्भ, और मीन) का विस्तृत विवरण दिया गया है। इसमें प्रत्येक राशि के गुण, दोष, और उनका जीवन पर प्रभाव बताया गया है।
4. जन्म कुंडली (Birth Chart)
जन्म कुंडली बनाने और उसका विश्लेषण करने की विधि इस ग्रंथ में विस्तार से बताई गई है। इसमें जन्म समय, जन्म स्थान, और ग्रहों की स्थिति के आधार पर कुंडली तैयार करने की प्रक्रिया का वर्णन है।







